आबुनाथस्वामी अबधूत विश्वगुरु महामण्डलेश्वर परमहंस श्री महेश्वरानन्द पुरीजी, पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा

मैं जो भी कहता हूं वह महाप्रभुजी के ही शब्‍द हैं । वेदों और उपनिषदों में जो कहा गया है वह महाप्रभुजी ने कहा है । मेरी इच्‍छा आप सब को केवल शरीर से ही स्‍वस्‍थ व सुन्‍दर बनाने की नहीं है, मैं तो आपको जन्‍म मरण के बन्‍धन से ही छुटकारा दिलाना चाहता हूँ । मेरा प्रयास आपके समस्‍त कर्मों को ही काट देने का है । मैं उस सबसे बडे वकील से आपकी वकालत कर रहा हूं और करता रहूंगा कि जब आप इस संसार से जाएं तो आप खाली हाथ न जायें उस समय आपके साथ असली ज्ञान की ज्‍योति भी हो जो आपको परम प्रभु से मिला दे ।

June 2014

हंगरी के वेप में स्वामीजी का समर सेमिनार

यूरोप के उत्‍तरी क्षेत्र की गर्मी की ऋतु में आयोजित रिहाइशी योग सम्‍मेलनों में स्‍वामी जी बहुत सालों से अनगिनत बार अध्‍यात्‍म के विषय में शि‍क्षा देते रहे हैं । साथ ही साथ योगासन भी करवाते रहे हैं । और अब २०१४ का दैनि‍क जीवन में योग के ग्रीष्‍म सम्‍मेलन इस सप्‍ताह वेप, हंगरी में शुरू हो गये हैं।
April 2014

फिजी में दैनिक जीवन के अनुष्‍ठानों में आत्‍म अनुभूति योग

वनुआ लेवू फिजी आईलैंड में आयोजित अनुष्‍ठान में परमहंस स्‍वामी महेश्‍वरानन्‍द ने श्री आदि शंकराचार्य की आपोरक्षा अनुभूति के विषय में बताया और उसकी व्‍याख्‍या भी की इसमें भाग लेने आये लोगों ने श्री आदि शंकराचार्य के जीवन के वि‍षय में जाना ऐसा लगता था जैसे शंकराचार्य की आत्‍मा वहां रोज होनेवाले सत्‍संगों में उपस्थित रहती थी ।
April 2014

संत परमहंस स्‍वामी महेश्‍वरानन्‍द न्‍यूजीलैंड में

यह हमारा परम सौभाग्‍य है कि स्‍वामी जी फिर से ७ से १३ अगस्‍त तक न्‍यूजीलैंड में पधारे हैं। यहां उनके भाषणों और सत्‍संगों का विषय था दैनिक जीवन में योग द्वारा मन में शान्ति एवं सदभावना का जागरण।